मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा, चाहे सारा जग रूठे....

मैं हुं तेरी तूं है मेरा, तुमसे हो जाए प्यार घनेरा,

हो तेरे बिना अंधियारा, चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा....

मुझमें अपना प्रेम बढ़ा दे, मन मंदिर में ज्योत जगा दे,

तेरे प्रेम ने सबको तारा, चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा....

तेरे बिना मैं जी ना पाऊं, तेरे चरणों में रहना चाहूं,

तेरे संग मरना है गवारा, चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा....

तेरे बिना कोई ना साथी, तू ही दीपक तू ही बाती,

तू ही देव हमारा चाहे सारा जग रूठे,

मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।