करुणामयी सुख की दाता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करुणामयी सुख की दाता,

जय जय जय लक्ष्मी माता,

मां हमारे घर भी आओ,

सुख निर्झर सदा बरसाओ,

उसने सुख सदा ही पाया,

जो मां शरण तुम्हारी आया,

हम भी शरण गहें तुम्हारी,

विपदा किससे कहें हमारी,

संताप हरो मां बनो सहारा,

करो कृपा मां हमपे अपारा,

मन वचन हो कर्मों की शुद्धि,

सात्विक हो मां हमारी बुद्धि,

अधर गाएं सदैव नाम तुम्हारा,

राजीव गाए सदैव नाम तुम्हारा,

मन में सदा मैया तुमको धारा।

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।