बंसी बाजे रे मधुबन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे सांवरिया,

अमृत बरसे सांवरिया दर्शन दे जा सांवरिया.....

सास ससुर मेरे गए वृंदावन ले डलिया में फूल,

ऐसो आयो हवा का झोंका कहीं कलियाँ कहीं फूल,

बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे सांवरिया....

जेठ जेठानी मेरे गए वृंदावन ले डलिया में फूल,

ऐसो आयो हवा का झोंका कहीं कलियाँ कहीं फूल,

बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे सांवरिया....

देवर देवरानी मेरे गई वृंदावन ले डलिया में फूल,

ऐसो आयो हवा का झोंका कहीं कलियाँ कहीं फूल,

बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे सांवरिया....

नन्द‌ नंदोई मेरे गए वृंदावन ले डलिया में फूल,

ऐसो आयो हवा का झोंका कहीं कलियाँ कहीं फूल,

बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे सांवरिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।