ईक दुनी दो ते दो दुनी चार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार,

हर वेले वंडदी माँ बच्चियां नु प्यार,

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार.....

तीन दूनी छ ते चार दूनी आठ,

बच्चियां दे दुखड़े रानी माँ देवे कट,

सच्चे दिलों जो भी आ जावे माँ दे द्वार,

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार.....

पंज दूनी दस ते छ दूनी बारह,

झंडेवाली माँ नु अपना हर बच्चा प्यारा,

भावे कोई फ़कीर होवे भावे शुंकार,

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार.....

सत दूनी चौदह ते आठ दूनी सोलह,

दिल दी गल मईया जी मैं किहदे नाल खोला,

मैं ता सुनया तू सुनदी सबदी पुकार,

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार.....

नौ दूनी अठारह ते दस दूनी बीह,

चरणा विच वगदी गंगा तू रज्ज रज्ज के पी,

चल विजय चलिए माँ वैष्णो दे द्वार,

ईक दुनी दो ते दो दुनी चार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।