बाबोसा तेरी मेहरबानियां

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - देखने को मुझको

मेरे हर गलती पे बाबोसा पर्दा तू डालके,

माफ कर रहा है हर खता,

जानती हूँ तुमसे बाबा कुछ भी न छिपा है,

सब कुछ तुमको है पता

ये तेरी महरबानियाँ, संवर गई जिन्दगानियाँ,

संवर गई जिन्दगानियाँ, ये तेरी महरबानियाँ,

मेरे बाबा मुझको तू बता,

तेरा मेरा क्या है रिश्ता.....

ज़िंदगी की राहो में जब मेने खाई ठोकर,

तब मेरे साथ तू ही खड़ा,

जब जब गमो ने मुझपर डाला है घेरा,

तूने सर पे हाथ था धरा,

मिली है इज्जत तुमसे, मिली है शौहरत तुमसे,

बाबोसा क्या में मांगू, न कोई चाहत तुमसे,

बिन मांगे सब कुछ दिया, हाय,

करती हूँ तेरा शुक्रिया.....

हक में जो न था मेरे वो भी मुझको मिला,

तूने ही दी है ये खुशियां,

खाक से उठाकर मुझको बिठाया फलक पर,

रोशन हुई ये दुनिया,

दिल का नाता है "दिलबर",

ओ मेरे प्यारे प्रभुवर,

छोड़ू न अब तेरा दर,

ओ मेरे प्यारे प्रभुवर,

मीनाक्षी ने आज कह दिया,

जीवन तेरे नाम कर दिया.....

करती हूँ तेरा शुक्रिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।