अज लख लख होण बधाईयां

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अज लख लख होण बधाईयां, खुशियां दियां घड़ियां आईयां,

दाते ने खुशी बिखाई, भगतां दे बेड़े बज उठी अज खुशियां दी शहनाई,

अज लख लख होण बधाईयां....

गुरूमुख प्यारे हरदम रहंदे सतगुरु दे सहारे,

अपने बच्चेयां दे मेरा सतगुरु सारे काज संवारे,

हां संवारे हां संवारे,

अज लख लख होण बधाईयां....

बनके घुंघरू नच्चे मनवा बोलण दिल दियां तारां,

जिन्ना ने पूरा गुरु रिझायां मानण मौज बहारां,

हां बहारां हां बहारां,

अज लख लख होण बधाईयां....

बद्दे फुल्ले बेल खुशी दी फलदी फुलदी जावे,

मेहर करो ए मेरे सतगुरु थोड़ कदे ना आवे,

ना आवे ना आवे,

अज लख लख होण बधाईयां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।