मेरा प्रणाम है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन विविध भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

गणपति गणेश नूं उमापति महेश नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है....-2

गणपति गणेश नूं ब्रह्मा विष्णु महेश नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है....-2

ईश्वर साईं दाता नूं अपने पिता माता नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है...-2

अंजनी के पूत नूं राम जी के दूत नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है...-2

सीता जी के राम नूं राधा जी के श्याम नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है....-2

माता शेरावाली नूं अष्ट भुजा वाली नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है....-2

नंद के दुलारे नूं यशोदा जी के प्यारे नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है...-2

सारी आई संगत नूं अपने अपने गुरां नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है....-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।