दर साई के चल

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दर साई के चल तू संग मेरे चल,

वो सबका मलिक,

वो सबका दाता,

वो साई मौला,

वो एक मसीहा……

साईं नाम की जोत जगाले,

मिट जाएगा अँधेरा,

बन जाएगी बिगड़ी तेरी,

होगा नया सवेरा,

इस जीवन की हर मुश्किल हो जाएगी हल,

दर साई के चल....

देख ले चल के कैसे छलकें,

अमृत ​​की वो बूंदे,

भाग्य संवरते झोली भरते,

नयन ज़रा जो मूंदें,

दुख को सुख में जो बदले ऐसा है वो पल,

दर साई के चल....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।