पार करो मेरा बेड़ा भवानी- बंसी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णुl गुरुर देवो महेश्वरः l

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नमः l

त्वमेव माताl च पिता त्वमेव,

त्वमेव बन्धुश्च, सखा त्वमेव l

त्वमेव विद्या च, द्रविणं त्वमेव,

त्वमेव सर्वम्, मम देवदेवं ll )

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ l

जय जय माँ,,, 'तेरी जय जय माँ ll'

आनन्दी आनंद करो, कल्याणी कल्याण l

माँ आठ पहर चौंसठ घड़ी, दिओ चरणा दा ध्यान ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

प्रथमे गुरु जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश l

त्रितिये सिम्रां शारदा, कारज़ करो हमेश ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

विघ्न विनाशन भय हरनी, करो बुद्धि प्रकाश l

लीजे नाम गणेश का, होत विघ्न का नाश ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

सदा भवानी दाहिनी, गौरी पुत्र गणेश l

पाँच देव रक्षा करे, ब्रह्मा विष्णु महेश ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

ऊँचे भवनी बैठ के, हर का मुज़रा ले l

जैसी जा की भावना, वैसा ही फ़ल दे ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

बेड़ा साडा डोलदा,,,,,,

पार करो मेरा बेड़ा भवानी,

पार करो मेरा बेड़ा ll

पार करो मेरा बेड़ा ll

मुझको आसरा तेरा भवानी,

पार करो मेरा बेड़ा,,,

पार करो मेरा बेडा,,,,,,,,,,,,

बेड़ा साडा डोलदा, विच सारा परिवार l

तैनू बाणीयाँ वाजां मारदा, माँ आवो शेर सवार ll

जय जय माँ,,, तेरी जय जय माँ,,,,,,,,,,,,,,

सूहे सूहे, चोलियाँ, वालिए राज़ / भोली माँ ll

महाँरानी सुनो, जन की अरदास,,,

हे, अरदास मेहराँ वालीए,,,,,

मेहराँ वाली मईया, सुनो जन की अरदास l

तेरे बच्चड़े, दर्शन तेरा, मांगते l

माँ तेरे बच्चड़े, दर्शन मंगदे ll

ओ माँ तेरे बच्चड़े, दर्शन मंगदे ll

माँ तेरे बच्चड़े, दर्शन मंगदे ll

मईया बच्चड़े, दर्शन तेरा,,, मांगते ll

अपना, खोलो खोलो, राज दरबार,,,

हे,,, राज दरबार, खोलो,,,,

शेराँवाली माँ,,, अपना, खोलो राज दरबार l

तेरा गुंद लिआई, मालिन सेहरा l

तेरा गुंद लिआई, मालिन,

'फुल्लाँ वाला सेहरा तेरा, फुल्लाँ वाला सेहरा' ll

फुल्लाँ वाला सेहरा तेरा, पुष्पां वाला सेहरा ll

तेरा गुंद लिआई, मालिन सेहरा l

फुल्लाँ वाला,,, तेरा फुल्लाँ वाला,,,

तेरा गुंद लिआई, मालिन सेहरा ll

हे मईया मेरी, पहनो पहनो l

हे दाता जी, पहनो पहनो l

पहनो मईया, सेहरा पहनो l

हे दाता मेरी, पहनो पहनो* l

पहनो मईया, पहनो देवी याद करां l

तेरियां ज्योतां तों मैं, वारे वारे जावाँ llll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।