दाता जी का हमने आज दर्शन पाना है

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॥ पावन पाठ ॥

दाता जी का हमने आज दर्शन पाना है,

तन मन को कर अर्पण मस्तक को झुकाना है....

दाता के मंदिर का एक अजब नजारा है,

चर्चा हो जमाने में कुछ ऐसा सजाना है,

बाबा के मंदिर को सोने का बनाना है,

दाता जी का हमने आज दर्शन पाना है....

जो पास हमारे है दाता का दिया तो है,

उसे अर्पण करने मे केसा शरमाना है,

दाता जी का हमने आज दर्शन पाना है....

हम दास ये कहते हैं, चरणों में रहते हैं,

तन मन को कर अर्पण मस्तक को झुकाना है,

दाता जी का हमने आज दर्शन पाना है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।