ना किसी की नजर लागे

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॥ पावन पाठ ॥

ना किसी की नजर लागे, मेरे प्रभु जी की नजरिया को,

मैने काजल लगा दियो रे, प्रभु जी की नजरिया को....

स्वर्ग से भी है सुंदर नजारे,

नभ से आये उतर चांद तारे,

बस एक बार दर्श करू प्रभु तेरी नगरिया को,

ना किसी की नजर लागे, मेरे प्रभु जी की नजरिया को,

मैने काजल लगा दियो रे, प्रभु जी की नजरिया को....

यहां आते हैं सारे गुरुमुख जी,

पाते दर्शन हो जाते आनंदित जी,

देवता गण भी कहते,

नमन प्रभु जी की नगरिया को,

ना किसी की नजर लागे, मेरे प्रभु जी की नजरिया को,

मैने काजल लगा दियो रे, प्रभु जी की नजरिया को....

सतगुरु नाम से हो सवेरा यहां,

परमहंस का रहता है डेरा यहां,

तेरा दास ये जाए कहां छोड़ तेरी नगरिया को,

ना किसी की नजर लागे, मेरे प्रभु जी की नजरिया को,

मैने काजल लगा दियो रे, प्रभु जी की नजरिया को....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।