आया खुशियां दा वेला आया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आया वेखो आया शुभ राज तिलक है आया,

राज तिलक है आया संगता ने दर्शन पाया,

आया वेखो आया खुशियां दा वेला आया,

आया वेखो आया शुभ राज तिलक है आया....

सतगुरू जी दा दर्शन करलो,

मन मूरत नू दिल विच धर लो

अपरम्पार है महिमा इनकी जग है सारा केंन्दा,

आया वेखो आया शुभ राज तिलक है आया....

खुशियां दा आज वेला आया,

संगता ने प्रभु दर्शन पाया,

खुशियां दे वेले च संगता ने ढोल बजाया,

आया वेखो आया शुभ राज तिलक है आया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।