दुर्गा शेर सजाके री आजा दंगल में

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रे मईया शेर सजाके री, एक बार आजा दंगल में,

दुर्गा शेर सजा के री, मैय्या आजा दंगल में....

कालका अखण्डी चण्डी, मुण्ड माला धारिणी,

असुरों के झुण्ड रुण्ड मुण्ड कर डारिणी,

मार दिये दाना दंगल में, आज्या दंगल में....

भगतो की सहाई, दुष्टों को संघारणी,

खड़क खप्पर ले के शीश, बैरी का उतारनी,

फंसा दुश्मन को चंगुल में, आज्या दंगल में....

ब्राह्मणी रुद्राणी तू ही, तू ही माता भारती,

धूप दीप ले के पहले, करू तेरी आरती,

रिद्ध सिद्ध दीजो मंगल में, आज्या दंगल में....

"हरिनारायण शर्मा" कहे तेरे को मनाऊ में,

भूल को सुधार कीजे, छंद को बनाऊ में,

ध्यान नही दीन्या पिंगल में, आज्या दंगल में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।