गौरा के संग में गजानन खड़े

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

पहली शिकायत मैंने ब्रह्मा जी से किनी,

ब्रह्मा से किनी ब्रह्माणी ने सुन लीनी,

वेदो का ज्ञान पढ़ोगे के नाय मुझसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

दुजी शिकायत मैंने विष्णु जी से किनी,

विष्णु से किनी लक्ष्मी जी ने सुन लीनी,

बैकुंठ धाम चलोगे के नाय मोसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

तीजी शिकायत मैंने भोले जी से किनी,

भोले से किनी गौरा जी ने सुन लीनी,

डमरू की डम डम सुनोगे के नाय मोसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

चौथी शिकायत मैंने रामाजी से कीनी,

राम जी कीनी सीता जी ने सुन लीनी,

अवध की सैर करोगे के नाय मोसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

पांचवी शिकायत मैंने कान्हा जी से किनी,

कान्हा से किनी राधा जी ने सुन लीनी,

मुरली की तान सुनोगे के नाय मोसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

छठवी शिकायत मैंने सन्तों से किनी,

संतो से कीनी भक्तों ने सुन लीनी,

भक्तों को ज्ञान तुम दोगे के नाय मोसे बोलत नाय,

गौरा के संग में गजानंद खड़े मोसे बोलत नाय....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।