आज डमरू बजा दे भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज डमरू बजा दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले,

नाम वाली मस्ती का प्याला,

सबको पिला दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले....

डम डम तेरा डमरू बजता,

सुन तान पे रझ के नचता,

दर्शन को भक्तों का मेला लगता,

सबको दर्शन दिखा दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले....

ब्रह्मा विष्णु आदि भवानी,

सबने है मस्ती की ठानी,

धरती पाताल और आसमानी,

सबपे रौनक ला दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले....

अमृत रस राजीव पी जाए सारा,

ऐसी बरसादे भोले तू धारा,

नशा चढ़ा दे भक्ति का प्यारा,

सबको पिला दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले....

आज डमरू बजा दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले,

नाम वाली मस्ती का प्याला,

सबको पिला दे भोले,

आज सबको नचा दे भोले.....

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।