रहमत बरस रही है बाबा तेरी नज़र से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी रहमत का है बोझ इतना जिसे मैं उठाने के काबिल नहीं हूँ,

मैं आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ तेरी चौखट पे आने के काबिल नहीं हूँ....

रहमत बरस रही है बाबा तेरी नज़र से,

ये सृष्टि पल रही है बाबा तेरी नज़र से,

रहमत बरस रही है......

तेरे हुकुम से बाबा सूरज निकल रहा है,

तेरे हुकुम से खाटूवाले सूरज निकल रहा है,

हर शाम ढल रही है बाबा तेरी नज़र से,

रहमत बरस रही है......

तुमसे ही चाँद तारे तुमसे गगन सितारे,

तुमसे ही चाँद तारे सारे तुमसे गगन सितारे,

ये हवाएं बह रही हैं बाबा तेरी नज़र से,

रहमत बरस रही है......

दरिया दया का तुम हो खुशियों का तुम चमन हो,

करुणा निकल रही है, बाबा तेरी नज़र से,

रहमत बरस रही है.......

ब्राह्मण का है ये कहना बस इतना ध्यान देना,

ब्राह्मण का है ये कहना बाबा बस इतना ध्यान देना,

मेरी नाव चल रही है बाबा तेरी नज़र से,

रहमत बरस रही है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।