कोई ना दुःख न मिले उसको

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कोई दुःख न मिले उसको जो पूर्णा के घर आये,

रहमत की घटा बन के तू सुख ही बरसाए,

मैंने सुना मैया जो सब ने बताया है

जब दुःख आये सिर पे कोई साथ ना आया है,

अब तेरा सहारा है तू दुःख दे या हरषाए,

कोई ना दुःख न मिले उसको........................

ना पास दवानी ना पास चवानी है,

मुझको चिढाते है जिनके पास दवानी है,

तू एक रुपिया दे मुह उनका उतर जाये,

कोई ना दुःख न मिले उसको................

जिनको जग वालो से माँ मिले अन्देरे है,

तूने किरपा से माँ लिख दिए सवेरे है,

दुःख दूर रहे उनसे गम पास नही ए,

कोई ना दुःख न मिले उसको.................

एक दुखारी नारी माँ बात कहे अपनी,

तू भाग्यविदाता है तू है मंगल करनी,

चरणों में रहे ये मन कही और नही जाये,

कोई ना दुःख न मिले उसको................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।