नगरी हो अयोध्या सी (maithili thakur)

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो,

चरण हो राघव के जहा मेरा ठिकाना हो…..

लक्ष्मण सा भाई हो कौशल्या माई हो,

स्वामी तुम जैसा मेरा रघुराई हो,

नगरी हो अयोध्या सी,रघुकुल सा घराना हो…..

हो त्याग भरत जैसा सीता सी नारी हो,

लव कुश के जैसी सन्तान हमारी हो,

नगरी हो अयोध्या सी,रघुकुल सा घराना हो…..

श्रद्धा हो श्रवण जैसी शबरी सी भक्ति हो,

हनुमान के जैसे निष्ठा और शक्ती हो……

मेरी जीवन नैया हो प्रभु राम खेवैया हो,

और राम कृपा की सदा मेरे सर छय्या हो,

नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो,

चरण हो राघव के जहाँ मेरा ठिकाना हो…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।