भाव नहीं तो कुछ भी नहीं है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव के भूखे हैं भगवान,

भाव नहीं तो कुछ भी नहीं है,

भाव नहीं तो कुछ भी नहीं है,

लाख करो गुणगान....

एक थी शबरी भक्तन,

न्योछावर करके तनमन,

मतंग मुनि के संग में,

करती थी प्रभु का कीर्तन,

बागो से चुन चुन लाती,

प्रभु को फुल चढ़ाती,

गंगा के पावन जल से,

रोज स्नान कराती,

चरण धोके श्री राम का करती,

चरण धोके श्री राम का करती,

चरनामृत का पान,

भाव के भूखे हैं भगवान....

मतंग शबरी को बताये,

बहु भांति समझाए,

सबर कर कुछ दिन शबरी,

मिलन के दिन अब आये,

रामजी तुमसे मिलेंगे,

मेरी कुटिया में आ कर,

शबरी को धैर्य बंधाकर,

समाधी लिए गुरुवर,

राम नाम में लीन हो गयी,

गुरु से पाकर ज्ञान,

भाव के भूखे हैं भगवान…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।