साईं बाबा मेरे घर आऔ

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे अंगना के भाग जगा मोरी अंखियो की प्यास भुजाओ

साईं बाबा मेरे घर आऔ,

कब तक तुमरी राह निहारे मेरे प्यासे नैना,

बिन दर्शन ये नैन विचारे कैसे पाए चैना,

अपनी प्यारी प्यारी सूरत मुझको भी दिखलाओ,

साईं बाबा मेरे घर आऔ.............

तुमसे मेरी आस है साईं तुमहो मेरा सपना,

एक तुम ही हो अपने मेरे कोई नही है अपना,

उजड़ी हु है मेरी कुट्टिया इसको स्वर्ग बनाओ,

साईं बाबा मेरे घर आऔ...................

जपता रहता है मेरा मन तुम्हारे नाम की माला,

कब तक अन्दिया रो में रहू मैं देदो मुझको उजाला,

ऐसे नही आते हो तो फिर सपने में आ जाओ,

साईं बाबा मेरे घर आऔ.....................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।