चाबी ताले की बहना

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॥ पावन पाठ ॥

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी बेटे ने मांगी,

मैं तो दे देती री बहना सेवा कबहु ना किनी,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी बहूओ ने मांगी,

मैं तो दे देती री बहना आदर कबहु ना किनो,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी बेटी ने मांगी,

मैं तो दे देती री बहना कहना कबहु ना मानो,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी पोते ने मांगी,

मैं तो तेरी तेरी बहना लढिया कबहु ना पकड़ी,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी राजा ने मांगी,

मैं तो दे देती री बहना दिल की कबहु ना पूछी,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

यह चाबी सतगुरु ने मांगी,

मैंने ना दीनी री बहना खुनटी पर धर दीनी,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

धर्मराज को आयो रे बुलावो,

छोड़ो सब चल दीनी री बहना जनों जनों याहे मांगे,

चाबी ताले की बहना जनों जनों जाए मांगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।