बिन पिये नशा हो जाता है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बिन पिये नशा हो जाता है,

जब सूरत देखू भोले की…

उसके शीश पे चंदा विराज रह्या,

चंदा की चांदनी में खो जाऊ,

जब सूरत देखू भोले की,

बिन पिये नशा हो जाता है,

जब सूरत देखू भोले की…

उसके गले में नाग विराज रह्या,

नागा की लहर में खो जाऊ,

जब सूरत देखू भोले की,

बिन पिये नशा हो जाता है,

जब सूरत देखू भोले की…

उसके हाथ में डमरू विराज रह्या,

डमरू की ताल में खो जाऊ,

जब सूरत देखू भोले की,

बिन पिये नशा हो जाता है,

जब सूरत देखू भोले की…..

उसके पैरो में घुंघरू विराज रहे,

घुंघरू की ताल में खो जाऊ,

जब सूरत देखू भोले की,

बिन पिये नशा हो जाता है,

जब सूरत देखू भोले की……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।