तांडव करते शिव भडांरी

अशवनी सितारा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तांडव करते शिव भडांरी ॥

धरती कांपे अबंर कांपे ॥

कांपे ऋिषटी सारी

तांडव करते.................

दकष परजापती जगन राचाया

सब देवो को उसने बुलाया ॥

महादेव को दिल से भुलाया ॥

भुल कर बैठा भारी

तांडव करते़.......................

अागे की फिर सुनो कहानी

हठ कर बैठी मात भवानी ॥

शिव भोले की एक ना मानी ॥

जाने की कर ली तयारी

ताडव करते़.....................

सती ने खुद को कुड मे जलाया

शिव गणो ने उधम मचाया॥

सभा मे सबको मार मुकाया ॥

काटे वारो बारी

ताडव करते़...............

तीसरा नेंतर शिव ने खोला

धरती अंबर सब कुछ डोला ॥

बिटटु सितारा मुख से बोला ॥

बखशो बखषन हारी

ताडव करते़...................

लेखक-अशवनी सितारा

गायक- विपन शरमा बिटटु

मोबाईल-098154 02742

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।