रोम रोम में रम रहा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रोम रोम में रम रहा,

कण कण में तू बस रहा,

रोम रोम में रम रहा,

कण कण में तू बस रहा...

तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,

रोम रोम में रम रहा,

कण कण में तू बस रहा...

अग्नि की तू है अगन,

जल की तू है शीतलता,

सूरज में तेरी तपन,

चांदनी में तू चमक रहा,

नदियां चलें है तेरी धारा,

सागर तुझसे बह रहा,

रोम रोम में रम रहा,

कण कण में तू बस रहा,

तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,

रोम रोम में रम रहा……

फूलो में खुशबू तेरी,

श्रृंगार में है रस तेरा,

मोती माला कुंडल देखो बखान तेरा गा रहा,

अधभूत रूप निराला तेरा,

दर्शन देखो दे रहा,

रोम रोम में रम रहा,

कण कण में तू बस रहा,

तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,

रोम रोम में रम रहा……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।