मेलो आयो आ चेटीचंड जो

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मोलो आयो आ चेटीचंड जो

सब मिली करे धूम मचाइंदा

लालण खे मनाइंदा झुलणं खे मनाइंदा

चलिये वारे खे मनाइंदा

सुरग खा भी सुहिणो आ झुलणं जो दर प्यारो

अचे जेको दर ते उहो आहे भागन वारो

मथो टेके करे लालण जे दर

मथो टेके करे झुलणं जे दर

असा पहेन्जा भाग जगाइंदा

झुलणं जे मंदर में सब बेराणा कडाईंदा

ज्योत जगाए पलव पाराये मन ज्यू मुरादू पायिन्द

सच्ची आस रखी अच्चो हिन् दरते 2

लाल सबजी आस पूजाईदा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।