दान करो दिल खोल के

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॥ पावन पाठ ॥

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के,

माया को जोड़के, माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

यह माया मैंने बेटों को जोड़ी,

तीन दी सर फोड़के क्या करोगे माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

यह माया मैंने बहुऔ को जोड़ी,

छीन ली चाबी छीन के क्या करोगे माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

यह माया मैंने बेटी को जोड़ी,

चली गई दिल तोड़के क्या करोगे माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

यह माया मैंने पोते को जोड़ी,

छीन लई टांगे तोड़के क्या करोगे माया को जोड़के,

लूटा रहे दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

यह माया मैंने खुद को जोड़ी,

ले गए चोर ताला तोड़कर क्या करोगे माया को जोड़के,

दान करो दिल खोल के क्या करोगे माया को जोड़के....

धर्मराज का आया रे बुलावा,

चली गई सब छोड़ करके क्या करोगे माया को जोड़के,

चली गई नाता तोड़ के क्या करोगे माया को जोड़के.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।