रात भैरो बाबा की जगायेंगे अखाड़ों

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॥ पावन पाठ ॥

रात भैरो बाबा की जगायेंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे...

तेल सिन्दूर को चोला चढ़वायेंगे,

ज्योत अंगना में जलाएंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे....

ढोल नगाड़े बजाये के बुलाएँगे,

अर्ज भैरो बाबा से लगाएंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे....

पुआ पापड़ी भैरो जी ने भावे,

सोमरस प्याले भरायेंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे.....

भजन गाये भैरो बाबा को रिझावे,

बाबा को रिझावे भैरो बाबा को रिझावे,

ढोक चरणों में लगाएंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे.....

भैरो बाबा बड़ो मतवालों,

बड़ो मतवालों लागे बड़ो प्यारो,

रात भैरो बाबा की जगायेंगे अखाड़ों भैरो बाबा को कराएँगे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।