म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे,

म्हारी आठ बरस की तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे,

म्हारी घूम घुमेरी तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे,

सवारियों ले गयो रे बंसी वालो ले गयो रे,

म्हारी अंगनिया री शोभा ने सांवरियो ले गयो रे,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

सुसरा जी लगाया तुलसा रो बिडलो,

म्हारी सासुजी ने सीचो रे ताम्बा की झारी से,

ताम्बा की झारी से रे ताम्बा की झारी से,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

जेठ जी लगाया तुलसा रो बिडलो,

म्हारी जेठानी ने सीचो रे ताम्बा की झारी से,

ताम्बा की झारी से रे ताम्बा की झारी से,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

देवर जी लगाया तुलसा रो बिडलो,

म्हारी देवरानी ने सीचो रे ताम्बा की झारी से,

ताम्बा की झारी से रे ताम्बा की झारी से,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

नन्दोई जी लगाया तुलसा रो बिडलो,

म्हारी बाईसा ने सीचो रे ताम्बा की झारी से,

ताम्बा की झारी से रे ताम्बा की झारी से,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

राजा जी लगाया तुलसा रो बिडलो,

कोई हमने तो सीचो रे ताम्बा की झारी से,

ताम्बा की झारी से रे ताम्बा की झारी से,

म्हारी अंगनिया री तुलसा ने सांवरियो ले गयो रे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।