खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले,

ओ मेरे बंसी वाले ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

पहलो बेटा यूँ उठ बोले अम्मा की खटिया कमरा में ओ मेरे बंसी वाले,

पहली बहुअल यूँ उठ बोले मेरो बेड बिछेगो कमरा में ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

दूजो बेटा यूँ उठ बोले अम्मा की खटिया आँगन में ओ मेरे बंसी वाले,

दूजी बहुअल यूँ उठ बोले मेरो टीवी लगेगो आँगन में ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

तीजो बेटा यूँ उठ बोले अम्मा की खटिया बरंडा में ओ मेरे बंसी वाले,

तीजी बहुअल यूँ उठ बोले मेरे बच्चा खेले बरंडा में ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

चौथो बेटा यूँ उठ बोले अम्मा की खटिया पोरी पे ओ मेरे बंसी वाले,

चौथी बहुअल यूँ उठ बोले मेरो कुत्ता बँधेगो पोरी पे ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

पांचवो बेटा यूँ उठ बोले अम्मा की खटिया बाड़ा में ओ मेरे बंसी वाले,

पांचवी बहुअल यूँ उठ बोले मेरी भैंस बँधेगो बाड़ा में ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

बुढ़िया माई यूँ उठ बोले बहु बेटा मेरे बेरी हो गये,

मोहे अपनी शरण बुला रे ओ मेरे बंसी वाले,

खटिया पे राड मचे भारी ओ मेरे बंसी वाले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।