प्रभु तेरा द्वार ना छुटे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

तुझे छोड़ कर दूजे द्वार का अब नही सुझे रे,

द्वारिका धीश अब तेरी द्वारका,

द्वारिका धीश अब तेरी द्वारका,

ना हुंसे छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

सदा सुहागन द्वार तुम्हारे देहरी पूजे रे,

सदा सुहागन द्वार तुम्हारे देहरी पूजे रे,

देहरी छोड़ को जो कोई जावे,

देहरी छोड़ को जो कोई जावे,

किस्मत फूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

जाती रूठे पाती रूठे साथी रूठे रे,

जाती रूठे पाती रूठे साथी रूठे रे,

रूठ जाए सब घर परिवरा,

रूठ जाए सब घर परिवरा,

पेर तू मत रूठे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

बंधु छूटे भंढ़व छूटे बंधन छूटे रे,

बंधु छूटे भंढ़व छूटे बंधन छूटे रे,

कभी ना छूटे हाथ का कंगन,

कभी ना छूटे हाथ का कंगन,

ना प्रीतम छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

नही छूटे तेरा भजन पूजन ना दर्शन छूटे रे,

नही छूटे तेरा भजन पूजन ना दर्शन छूटे रे,

नही छूटे तेरा सेवा चाकरी,

नही छूटे तेरा सेवा चाकरी,

ना सत्संग छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

तुझे छोड़ कर दूजे द्वार का अब नही सुझे रे,

द्वारिका धीश अब तेरी द्वारका,

द्वारिका धीश अब तेरी द्वारका,

ना हुंसे छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

सदा सुहागन द्वार तुम्हारे देहरी पूजे रे,

सदा सुहागन द्वार तुम्हारे देहरी पूजे रे,

देहरी छोड़ को जो कोई जावे,

देहरी छोड़ को जो कोई जावे,

किस्मत फूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

जाती रूठे पाती रूठे साथी रूठे रे,

जाती रूठे पाती रूठे साथी रूठे रे,

रूठ जाए सब घर परिवरा,

रूठ जाए सब घर परिवरा,

पेर तू मत रूठे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

बंधु छूटे भंढ़व छूटे बंधन छूटे रे,

बंधु छूटे भंढ़व छूटे बंधन छूटे रे,

कभी ना छूटे हाथ का कंगन,

कभी ना छूटे हाथ का कंगन,

ना प्रीतम छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

नही छूटे तेरा भजन पूजन ना दर्शन छूटे रे,

नही छूटे तेरा भजन पूजन ना दर्शन छूटे रे,

नही छूटे तेरा सेवा चाकरी,

नही छूटे तेरा सेवा चाकरी,

ना सत्संग छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

छूट जाए संसार,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे,

प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।