भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सिर पे ओ भोले अपने चुनरिया डाल के,

भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के.....

ये तो बता दो कहा छुपेगी ये कंठी ये माला,

ये कंठी ये माला..

कहां छुपाओ भोले अपनी ये सर्पो की माला,

ये सर्पो की माला..

इनको तो गोरा मेरी झोली में डाल दे,

भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के....

ये तो बता दो कहा छुपेगा ये गंगा का पानी,

ये गंगा का पानी..

मर्दानी आवाज को भोले कैसे करोगे जनानी,

कैसे करोगे जनानी..

मुख पे तू गोरा मेरे घुँघटा बस डाल दे,

भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के....

खबर पड़ी जब नंदलाला को नंदलाला मुस्काये,

नंदलाला मुस्काये..

सब तो आये बिन घूंघट के ये घूंघट में आये,

ये घूंघट में आये..

पाले पड़े हो भोले आज नंदलाल के,

भोला से बन गए भोली घुँघटा निकाल के....

घूंघट पलट दिया कान्हा ने भोलेनाथ मुस्काये,

भोलेनाथ मुस्काये..

उसी समय पर भोले दानी गोपेस्वर कहलाये,

गोपेस्वर कहलाये..

औघड़ दानी है भोले पर है कमाल के,

भोले से बन गए भोली घुँघटा निकाल के.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।