दिल करदा गुरां नूं चिट्ठी पावाँ

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओ दिल करदा गुरां नूं चिट्ठी पावाँ,

आपे गुरु पढ़ लैनगें....

कागज़ बिना चिट्ठी लिखी न जावे,

ओ इस चमड़ी दा कागज़ बनावाँ आपे,

ओ दिल करदा........

कलम बिना चिट्ठी लिखी न जावे,

ओ इन्हा हड्डियां दी कलम बनावाँ आपे,

ओ दिल करदा........

स्याही बिना चिट्ठी लिखी न जावे,

ओ इस रक्त दी स्याही बनावाँ आपे,

ओ दिल करदा.........

डाक बिना चिट्ठी भेजी न जावे,

ओ इस मन नूं मैं डाक बनावाँ आपे,

ओ दिल करदा..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।