म्हारो बेड़ो लगा दीजो

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

।। दोहा ।।

हनुमत तेरी धाक से, धुझे लंका कोट,

पायक हो श्री राम के, पेरे लाल लंगोट।

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

पांच पाना रो बिडलो बणायो,

भरी सभा फिरवाय,

उन बिड़ला ने कोई नहीं झेले,

हनुमत लियो रे उठाय,

बजरंग बाला जी,

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

बिडलो उठायो मुख में दबायो,

चरणा शीश नवाय,

कर किलकारी कूद गयो सागर,

पणगट छलांग लगाय,

बजरंग बाला जी,

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

पानी री पनिहारियाँ बोली,

कोण जिनावर आय,

जिण देश री सीता कहिजे,

वठा रो वानर आय,

बजरंग बाला जी,

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

इतरी बात सुणी हनुमत ने,

नवल बाग़ में आय,

जिण वृक्ष निचे सीता बैठी,

ला मुंदडी चिटकाय,

बजरंग बाला जी,

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

देख मुंदडी झुरबा लागी,

कोन जिनावर आय,

तुलसी दास आस रघुवर की,

नैना नीर भर आय,

बजरंग बाला जी,

मारो बेड़ो लगा दीजो पार,

बजरंग बाला जी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।