कोई नहीं अमर रहे दुनिया में

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॥ पावन पाठ ॥

अरे नर काहे पे करत गुमान, कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

कोई नहीं अमर रहो दुनिया में, कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

अरे नर काहे पे करत गुमान.....

भए अर्जुन बाड़ाधारी रथ हांक रहे बनवारी,

जिनके खाली न जाएं बाण कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

अरे नर काहे पे करत गुमान.....

भयो रावण शो बलवंता जिसकी सब सोने की लंका,

कर दिए देवन के अपमान कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

अरे नर काहे पे करत गुमान.....

भए भीष्म पितामह बलशाली जाके मौत पास नहीं आती,

अरे तीरन पर करें विश्राम कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

अरे नर काहे पे करत गुमान.....

वो बाली हुयो बलशाली किष्किंधा राज वाको भारी,

अरे वाह मारे प्रभु श्री राम कोई नहीं अमर रहो दुनिया में,

अरे नर काहे पे करत गुमान.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।