बरसे धारा बरसे धारा

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - चल अकेला चल अकेला

बरसे धारा... बरसे धारा.... बरसे धारा.....

गुरु ऋषभ की याद में आंखों से ये बरसे धारा.....

विरह की वेदना अब गुरुवर हमको है सताये,

आ....

कहो दिल की ये पीड़ा ,हम जाकर किसको सुनाये,

आ...

हर भक्त पे मानो डाल दिया है , आज गमो ने डेरा,

बरसे धारा... बरसे धारा.... बरसे धारा.....

गुरु ऋषभ की याद में आंखों से ये बरसे धारा.....

लूटाकर प्यार भक्तो पर कहा तुम चले गये,

आ...

खुशियों के बादल देखो, गमो में ढल गये,

आ...

सुख का सूरज डूबा, छाया दुखो का ये अंधियारा,

बरसे धारा... बरसे धारा.... बरसे धारा.....

गुरु ऋषभ की याद में आंखों से ये बरसे धारा.....

पीयूष ये साथ है जन्मों का अब हम कैसे तोडले,

आ...

जिनचन्द्र प्रीत है तुमसे , कैसे मुख ये मोडले,

आ...

गुरु ऋषभ पुकारे दिलबर , हर भक्त ये आज तुम्हारा,

बरसे धारा... बरसे धारा.... बरसे धारा.....

गुरु ऋषभ की याद में आंखों से ये बरसे धारा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।