हर बात बन जाये

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - जब जब बहार आये

होंठो पे मेरे जब भी बाबोसा नाम आये,

हर बात बन जाये,

जब मुस्किलो ने घेरा, आये जो गम के साये,

हर बात बन जाये......

इनके भरोसे ही मेरे जीवन की नैया चलती,

तूफान हो या आंधी, उसको तो राह मिलती,

हो..हो..

बाबोसा बनके माझी, मेरी नैया को चलाये,

हर बात बन जाये......

मुझको गले लगाकर, हरपल दिया सहारा,

तेरे नाम से ही बाबोसा, मेरा चल रहा गुजारा,

हो..हो..

खुशियों के दीप तुमने, जीवन में जो जलाये,

हर बात बन जाये....

अपना बनाया जो मुझे, तेरा रहमो करम है,

मेरे साथ है जो बाबा, फिर न फिकर न गम है,

हो..हो..

"दिलबर " तेरे फसाने, नागेश गुन गुनाये,

हर बात बन जाये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।