वारी बरसाने वाली बारी तज गए बनवारी

- प्रभात मस्ताना
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राग :- मल्हार

( बिरहा बिरह की बावरी, गाय रही बिरहा बबिरहन के गीत,

तननस्तन की तनिया चुभ रही मोहे निर्मोही संग प्रीत,

प्रीत किए अति दुख मिले ये कैसी रीत अनीत,

अब बाजी लग गई श्याम सौ सखी हार होय या जीत।। )

वारी बरसाने वाली बारी तज गए बनवारी, वन वन मै घूमू बनके बावरी,

कि मोकू रोग विरह कौ दे गए, मोसे परसों की मोहन कह गए, चित्त चुराके लै गए ,

वन वन मै घूमूं बनके बावरी,

ओ ओ ओ......

साजन बिना ये कैसा सावन क्या श्रृंगार सजाऊं,

पिया विरह में भई बावरी ममैं जोगनिया बन जाऊं,

गली गली में नाचूं गाउं वीणा मधुर बजाऊं,

छोड़के मथुरा वन व्रंधावन कहीं नहीं मैं जाऊं,

मेरी बहना कान्हा कौ नाम पुकारू मथुरा में डेरा डारू,

जीवन की जगमग डोले नाव री

मेरी बहना बारी बरसाने वाली ........

गली गली में मैने ढूंढो तौऊ कहूं नहीं पायौ,

यमुना के तट सूने देखे कहूं नजर नहीं आयौ,

कहा कहा मैं नज़र पसारूं, कछू समझ नहीं आयौ,

दुनिया मोकूं नहीं सुहावे, सब वाही मै समायौ,

मेरी बहना सूख के पंजर है गई, अंखियों से नदिया बह गई,

दिल में है मेरे भक्ति भाव री,

ओ ओ ओ.....

बारी बरसने वाली बारी........

गायक :- प्रभात मस्ताना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।