पर्वत पर भांग धतूरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पर भांग धतूरा है,

बैकुंठ में तुलसा प्यारी हैं,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

एक रुप में तुलसा महारानी,

पर्वत पर भांग धतूरा है,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

किसे भाए भांग धतूरा है ,

किसे भाए तुलसा महारानी,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

भोले को भाए भांग धतूरा,

कान्हा को तुलसा महारानी,

बैकुंठ मैं तुलसा महारानी....

यह किस पर चढ़ते बेलपत्र,

और किस पर तुलसा महारानी,

बैकुंठ में तुलसा महारानी....

भोले पर चढ़ते बेलपत्र,

कान्हा को भोग तुलसा प्यारी,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

कौन उगाता भांग धतूरा,

कौन सीचे तुलसा प्यारी,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

नंदी गढ़ सीचे भांग धतूरा,

सारा जग तुलसा महारानी,

बैकुंठ में तुलसा महारानी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।