कान्हा की बाजे मुरलिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सावन की बरसे बदरिया कान्हा की बाजे मुरलिया,

बाजे मुरलिया बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया.....

ललिता भी नाचे विशाखा भी नाचे,

संग सखी सत्यभामा भी नाचे,

राधा की बाजे पायलिया कान्हा की बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया.....

रास रचो जमुना के तट पर,

धूम मची है बंसीवट पर,

तन मन की ना ही खबरिया कान्हा की बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया....

रसिया रस बरसाते रहना,

अपना रंग चढ़ाते रहना,

छूटे ना सारी उमरिया कान्हा की बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया.....

ऐसा रंग चढ़ा मेरे मोहन,

मीरा बन गई तेरी जोगन,

नाचे गली और मढैया कान्हा की बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया.....

नाचत नाचत हुई दीवानी,

अमर हो गई प्रेम कहानी,

याद करेगी यह दुनिया कान्हा की बाजे मुरलिया,

सावन की बरसे बदरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।