गुरु चरण कमल बलिहारी रे

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु चरण कमल बलिहारी रे,

मेरे मन की दुविधा टारी रे.....

भवसागर में नीर अपारा,

डूब रहा नहीं मिले किनारा,

पल में लिया उवारी रे,

मेरे मन की दुविधा टारी रे.....

काम क्रोध मद लोभ लुटेरे,

जन्म जन्म के बेरी मेरे,

सबको दीना मारी रे,

मेरे मन की दुविधा टारी रे.....

भेदभाव गुरुदेव मिटाया,

पूर्ण ब्रह्म एक दर्शाया,

घर-घर जोत उजारी रे,

मेरे मन की दुविधा टारी रे.....

जोग जुगत गुरुदेव बताई,

ब्रह्मानंद शांति मन आई,

मानुष देह सुधारी रे ,

मेरे मन की दुविधा टारी रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।