दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है

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॥ पावन पाठ ॥

दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है,

गम आंसुओं की धारा प्रकाश बरसती है....

सागर में आ रहे है तूफ़ान तो हजारो,

हे देव पार करना मेरी छोटी सी कश्ती है,

दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है....

तेरे दायरे में हम तो रहने दे मेरे बाबा,

तेरे दायरे के बाहर इक आग बरसती है,

दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है....

आना जरूर आना करके कोई बहाना,

तेरे चाहने वालो की कितनी बड़ी बस्ती है,

दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है....

दास तो इतना जाने जो है तेरा दीवाना,

सब के घरो में ज्योत तेरे नाम की जगती है,

दाता दर्श को तेरे मेरी अखियां तरसती है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।