दाता अगर तेरा सहारा मिल जाए

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॥ पावन पाठ ॥

दाता अगर तेरा सहारा मिल जाए,

मेरे जीवन की कशती को निश्चय ही किनारा मिल जाए....

तुम ही हो सबके सतगुरु देव, तुझसा नहीं कोई दूजा है,

गुरु भव से पार निकालेंगे तेरी पूजा ही बस पूजा है,

तेरे नाम का प्याला पीयू मैं, अगर तेरा जाम मिल जाए,

दाता अगर तेरा सहारा मिल जाए,

मेरे जीवन की कशती को निश्चय ही किनारा मिल जाए....

तेरा ही मैं बस दर्श करू, तेरा ही ध्यान लगाऊं मैं,

बस इतनी कृपा कर दो प्रभु, तेरे चरणों में बस जाऊं मैं,

तेरे नाम का प्याला पीयू मैं, अगर तेरा जाम मिल जाए,

दाता अगर तेरा सहारा मिल जाए,

मेरे जीवन की कशती को निश्चय ही किनारा मिल जाए....

सोचू तो भला मैं क्या सोचू, जो बैठे सोचने वाले हैं,

मैं जेब अपनी क्या देखूं क्या लाया था जो खाली है,

तू ही मिले सतगुरु हमको जनम दोबारा मिल जाए,

दाता अगर तेरा सहारा मिल जाए,

मेरे जीवन की कशती को निश्चय ही किनारा मिल जाए....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।