दाता जी मैं फकीर हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे,

दाता जी मैं फकीर हो गया,

फकीर हो गया मैं फकीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे....

रात दी उडीक नहियो दिन दी वी होश ना,

बस तेनु मिलने दा दिल विच जोश आ,

तेरे चरना च ला ले ने डेरे,

दाता जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे....

जेह्नु वी तेरा रंग चड़ जाये दाता,

कोई वी न फेर ओहनू रंग पाये दातिया,

दूर चिंता दे होये ने हनेरे,

दाता जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे.....

किसे दी नही लोड़ मैनु किसे दी ना चाह ऐ,

दर्शी निमानेया ने मली तेरी राह ऐ,

नजर आवे तू चार चुफेरे,

दाता जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।