वृन्दावन धाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चली मैं द्वारे चली, मेरे घनश्याम के ll

मेरे घनश्याम के जी, वृन्दावन धाम के ll

चली मैं द्वारे चली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

( जी )

सुना मेरे श्याम जी ने, कितनों को तारा है,

मीरा बाई का भी मैंने, ""सुना अफ़साना है"'' ll

जख़्म सारे दिल के मैं, उनको दिखाऊँगी,

हाल मेरे दिल का मैं, उनको सुनाऊँगी,,,

चली मैं द्वारे चली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

( जी )

दुनियाँ की ठोकरों ने, तुझ से मिला दिया,

मेरे श्याम सुन्दर तेरा, ""सोहना मुख़ भा गया"" ll

तेरे बिना अब नहीं, मेरा सहारा है,

तूने ही तो अपने सारे, भक्तों को तारा है,,,

चली मैं द्वारे चली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

( जी )

तेरा दास अब तेरे, दर पे आ गया,

सारा जग छोड़ मैं तो, "''वृन्दावन आ गया"" ll

तेरा दर छोड़ मुझे, कहीं नहीं जाना है,

*तेरे वृन्दावन में आ, मुझे वस जाना है,,,

चली मैं द्वारे चली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ll

श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी,

हे नाथ नारायण वासुदेवा ll

जय श्री, राधे राधे राधे,

जय श्री, राधे राधे राधे llll

हरि बोल, हरि बोल,

हरि बोल, हरि बोल ll

जय जय श्री राधे,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।