मेरा भी खाता खोल दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा भी खाता खोल दे, मां अपने दरबार में ll

जब भी मांगू, जो भी मांगू ll,, मिलता रहे उधार में,

मेरा भी खाता,,, जय हो lll खोल दे, मां अपने दरबार में ll

जो कुछ भी, है शर्तें तेरी, "कागज़ पर लिखवा ले मां" l

बेशक मुझको, गिरवी रख ले, "मुझसे साईंन करा ले मां" ll

तां कि कोई, फर्क ना आए ll,, मां बेटे के प्यार में,

मेरा भी खाता,,, जय हो lll खोल दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तूँ है साहू,कार मेरी मैं, "और कहीं क्यों जाऊं मां" l

तुझसे ही, लेकर के पूंजी, "अपना काम चलाऊं मां" ll

तेरे सिवा अब, कौन है मेरा ll,, आखिर इस संसार में,

मेरा भी खाता,,, जय हो lll खोल दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ना अनुभव है, काम नया है, "डर नुकसान का भारी है" l

कुछ तो गुर, सिखला दो मुझको, "चाहिए मदद तुम्हारी है" ll

*दास / रैंपी सफ़ल, हो जाए तेरा ll,, अपने कारोबार में,

मेरा भी खाता,,, जय हो lll खोल दे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।