कहां छुपे हो सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पूर्व ढूंढा पश्चिम ढूंढा, मैंने ढूंढा सब संसार रे,

तुम कहां छुपे हो सांवरिया.....

चलत चलत मोहै भई दुपहरी अखियां राह निहारे,

कहां छुपे हो जाकरके तुम ओ साजन मतवारे,

मोहे पिया मिलन की लगन लगी,

तुम मत ना करो आवार रे,

तुम कहां छुपे हो सांवरिया.....

पिता मेरे लाचार हुए हैं नहीं दिखता कुछ और,

विपता मुझ पर आन पड़ी है भए बहुत मजबूर,

आज्ञा दी तुम पति ढूंढो नहीं रसता कोई और,

तुम कहां छुपे हो सांवरिया.....

सखियों के संग आई हूं मैं कुछ तो राह दिखाओ,

हे परमेश्वर मेरी दुबला अब तो दूर भगाओ,

जंगल जंगल में भटक रही हूं नहीं मिले भरतार,

तुम कहां छुपे हो सांवरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।