इक बारी वृन्दावन जाना पै गया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इक बारी वृन्दावन जाना पै गया,

मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया....

मन्दिर च लोकी अग्गे पिच्छे फिरदे,

राधे राधे कहिन मुंह च फूल किरदे,

मैंनू मीठी वाणी दा स्वाद पै गया,

मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया....

बांके बिहारी जी दे भीड़ बड़ी,

मैं तां थक गई उत्थे लोकां च खड़ी,

बजियां सी तालियां ते रोला पै गया,

मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया....

केहड़ी गल्लो लोकां मारियां सी तालियां,

जी परदे तो बाहर सरकारां आ गईयां,

मैहकां दा खलारा चारों पासे पै गया,

मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया....

अक्खां नूं खुमारी चढ़ी नींद नस गई,

सांवरी जी सूरत मेरे नैंना बस गई,

पूछदे ने लोकी श्याम की कह गया,

मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।