तेरे दर आन वालेया दी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर आन वालेया दी बहड़ी कदे ना अड्डी,

बहड़ी कदे ना अड्डी भाव सागर तरी,

जदो राणा जी ने मीरा जी नु जहर भेज्या,

मीरा अमृत समझ के पी छड़या,

बन गयी बन गयी श्यामा जी ओह ता मिश्री दी डली,

तेरे दर.......

जदो राणा जी ने मीरा जी नु नाग भेज्या,

मीरा हार समझ गाल पा छड़या,

बन गयी बन गयी श्यामा जी ओह ता फुल्लां दी लड़ी,

तेरे दर......

जदो राणा जी ने मीरा जी नु बहार कडया,

मीरा रखया भरोसा दिल नाहियो छड़या,

तुर गयी तुर गयी श्यामा जी ओह वृन्दावन दी गली,

तेरे दर.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।