मेरी अम्बे तू कल्याणी देवी तू वरदानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी अम्बे तू कल्याणी देवी तू वरदानी,

मोहे अपने गले लगाले माता में अज्ञानी……

तेरी कृपा से इस जग में रोशन है चाँद और सितारे,

माता हमको पार उतारे हम है तेरे सहारे,

मुझ पर तेरी मेहर रहे माँ देवी तू वरदानी,

मोहे अपने गले लगाले माता में अज्ञानी…..

रूप तुम्हारा सबसे निराला इस जग में फैला उजियारा,

देख के इस उजियारे को माँ भक्त करे जय कारा,

भरदो झोली मेरी देवी तू वरदानी,

मोहे अपने गले लगाले माता में अज्ञानी…..

भक्ति का वरदान में पाव आठ पहर तुम्हरे गान गाऊं,

नाम तुम्हारा जप्ती जाऊं भव सागर को पार लगाउ,

मन मंदिर में तुम्हे बिठाऊ देवी तू वरदानी,

मोहे अपने गले लगाले माता में अज्ञानी……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।