आली रे आली दरबार है आली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली,

रक्षा करती भक्त जनों की,

माई शेरोवाली...

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली……

माई मेरी ओढ़ के बैठी देखो लाल चुनरिया,

देखो लाल चुनरिया,

माई तेरे रंग में रंगी है आज सारी नगरीया,

आज सारी नगरिया,

मुझको भी अपने रंग में रंग ले,

माई मेहरावाली……..

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली……..

( हे माँ तेरी ज्योति से नूर मिलता है,

सबके दिलों को सुरूर मिलता है,

जो भी आता है मेरी माई के दरबार,

उसे कुछ न कुछ जरूर मिलता है। )

मैय्या के दरबार मे जो अपना दामन फैलाए,

अपना दामन फैलाए,

जो अपना दामन फैलाए,

दरबार मे शेरावाली के अर्जी जो दिल से लगाए,

अरे भर भर झोली लेकर जाते ,

भर भर झोली लेकर जाते ,

जाता ना कोई खाली।

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली……..

चरणों मे मैय्या तेरे छप्पन गाये जगराता,

हम सब गाए जगराता,

हाथ जोड़ वन्दन करता तेरे आगे शीश झुकता,

आगे शीश झुकता,

तेरे आगे शीश झुकता,

सब भक्तन पर मेहर तू करना,

सब भक्तन पर मेहर तू करना माई शेरोवाली।

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली रे आली दरबार तेरा आली,

आली रे आली दरबार है आली,

आली रे आली दरबार है आली……

चरणों मे है तेरे दुनिया,

आगे न तेरे कोई टिका ,

झुका न वो किसी हाल में फिर,

दर पर जिसका सर झुका,

दया है तेरी मुझ पर मैय्या,

बाल बांका न कोई कर सका,

कोई कर सका ,

कोई कर सका,

कोई कर सका…….

बोलिये…..

श्री राज राजेश्वरी जगजननी,

माँ परम्बा ललिता महात्रिपुरा सुंदरी,

श्री सर्वशक्ति बिजासन रानी की जय……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।